
हर साल लाखों छात्र SSC (Staff Selection Commission) की परीक्षाओं में बैठते हैं, सरकारी नौकरी पाने की आशा लेकर। लेकिन SSC Phase 13 परीक्षा 2025 उन सभी उम्मीदों पर पानी फेर गई। इस बार परीक्षा प्रणाली में इतनी अव्यवस्था, तकनीकी गड़बड़ियां और प्रशासनिक लापरवाही रही कि छात्रों के भविष्य पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लग गया है।
❗ देरी से जारी हुए एडमिट कार्ड
सबसे बड़ी समस्या रही एडमिट कार्ड समय पर जारी न होना। परीक्षा से मात्र 12–24 घंटे पहले छात्रों को एडमिट कार्ड दिया गया। SSC जैसी प्रतिष्ठित संस्था से यह उम्मीद कतई नहीं की जाती कि वह अंतिम समय में छात्रों को अनिश्चितता की स्थिति में छोड़े।
📌 वेबसाइट बार-बार क्रैश हुई, लॉगिन नहीं हो पाया, छात्रों को बार-बार रिफ्रेश करना पड़ा। 📌 कई छात्रों को परीक्षा का स्थान, समय और तारीख अंतिम क्षणों में ही पता चला। 📌 छात्र ट्रैवल और योजना नहीं बना सके और हज़ारों को परीक्षा छोड़नी पड़ी।
यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि छात्रों के अधिकारों का उल्लंघन है।
📍 गलत और दूर-दराज़ परीक्षा केंद्र
हज़ारों छात्रों को उनके शहर से सैकड़ों किलोमीटर दूर केंद्र आवंटित किए गए, वह भी बिना किसी विकल्प के। छात्राओं और ग्रामीण छात्रों के लिए यह स्थिति अपमानजनक और असुरक्षित रही।
- एक छात्र को प्रयागराज से 300 किलोमीटर दूर परीक्षा केंद्र दिया गया
- कई छात्राओं को रात में सफर करना पड़ा, कोई सुविधा या सहायता नहीं
- 8 घंटे का सफर कर केंद्र पहुंचे छात्रों को बताया गया कि सर्वर डाउन है
क्या यही डिजिटल इंडिया है?
💻 तकनीकी खामियां — परीक्षा बनी मज़ाक
SSC जैसी संस्था से जिस तकनीकी प्रोफेशनलिज़्म की अपेक्षा थी, वह पूरी तरह फेल हो गया:
- बायोमैट्रिक मशीनें फेल हुईं
- OTP सिस्टम बार-बार फेल हुआ
- कुछ छात्रों को सीटिंग एरेंजमेंट ही नहीं मिला
- कई जगह परीक्षा ही कैंसिल कर दी गई
छात्रों को सेंटर से खाली हाथ लौटना पड़ा। क्या यही सरकार की तैयारी थी?
⚠ सरकार और SSC की चुप्पी — सबसे बड़ी नाकामी
इतनी बड़ी नाकामी के बावजूद SSC और केंद्र सरकार ने अब तक कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की, कोई अफ़सोस नहीं जताया और कोई समाधान नहीं दिया। यह चुप्पी बताती है कि छात्रों की पीड़ा से सरकार का कोई सरोकार नहीं।
सरकार का रवैया अपमानजनक है:
- बिना जवाबदेही के vendor को ठेका दिया गया
- कोई back-up प्लान नहीं था
- न सुप्रीम कोर्ट में याचिका, न कोई स्वतंत्र जांच
क्या युवाओं का भविष्य चुनावी भाषणों तक सीमित रह गया है?
📚 छात्रों के लिए आवाज़ उठाने वाले शिक्षक: Abhinay Sharma (Abhinay Sir)

जहां अधिकतर कोचिंग संस्थान और बड़े YouTube टीचर्स ने चुप्पी साध ली, वहीं Abhinay Sir ने छात्रों के साथ खुलकर आवाज़ उठाई।
- उन्होंने ट्विटर, यूट्यूब और लाइव वीडियो में SSC की विफलताओं को उजागर किया
- छात्रों से फॉर्म भरवाए, सबूत जुटाए और कोर्ट में जाने की बात की
- Reddit और Telegram जैसे प्लेटफॉर्म्स पर छात्रों ने उन्हें ‘सच्चा योद्धा’ बताया
“जब सब चुप थे, तब Abhinay Sir बोल रहे थे।” “बाकी सिर्फ कोर्स बेच रहे थे, ये कोर्ट की बात कर रहे थे।”
📢 छात्रों की आपबीती
- “मैं 250 km यात्रा कर परीक्षा केंद्र गया और server down होने से वापस लौट आया।”
- “रात 10 बजे एडमिट कार्ड आया, सुबह 7 बजे की परीक्षा थी। कैसे पहुंचती?”
- “बायोमैट्रिक फेल दिखा दिया, जबकि मैं समय से पहुंचा था।”
यह परीक्षा नहीं, छात्रों का मानसिक उत्पीड़न था।
🧾 निष्कर्ष
SSC Phase 13 परीक्षा 2025 भारत की परीक्षा प्रणाली पर एक काला धब्बा बन चुकी है। यह केवल एक परीक्षा नहीं थी — यह लाखों युवाओं के भविष्य, विश्वास और मेहनत से जुड़ा सवाल था।
सरकार को समझना होगा कि युवाओं का भविष्य भाषणों से नहीं, व्यवस्थाओं से बनता है। और यह व्यवस्था पूरी तरह असफल रही है।
👉 सरकार को तत्काल:
- इस vendor को blacklist करना चाहिए
- छात्रों को फिर से परीक्षा का मौका देना चाहिए
- जवाबदेही तय करनी चाहिए
वरना आने वाली पीढ़ी सिर्फ बेरोजगारी नहीं, व्यवस्था से घृणा लेकर पलेगी।
📝 विशेष अनुरोध: अपनी आवाज़ दर्ज करें
यदि आपने भी SSC Phase 13 परीक्षा में भाग लिया और किसी भी तरह की परेशानी का सामना किया — तो कृपया नीचे दिए गए फॉर्म को भरें।
👉 Google फॉर्म भरें:
🔗 https://docs.google.com/forms/d/e/1FAIpQLSe_1q_sUfZYh6AbCdt28MeP2FBTO75whEDHPJJC0yu7G7OSiQ/viewform?usp=dialog
🙏 कृपया इस फॉर्म को भरना न भूलें — यह सिर्फ आपकी नहीं, लाखों छात्रों की आवाज़ बन सकती है।
✍️ Author: Kapeesh Chaubey
🛠️ Editor: Team QuickDayNews






